
हर युवा खिलाड़ी का सपना होता है कि वह बड़ा होकर अपने देश का नाम रोशन करें और उसके लिए खेले लेकिन इनमें से कुछ कोअपने देश की ओर से खेलने का मौका नहीं मिलता है।
अपने देश को छोड़कर दूसरे देश की ओर से खेलना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक आसान काम नहीं है लेकिन दुनिया में कई ऐसे उदाहरण भी हैं जिन्होंने अपना करियर लंबा खींचने के लिए अपने देश को छोड़कर दूसरे देश से खेलने का निर्णय किया।
आज हम उन तीन खिलाड़ियों के बारे में बात करेंगे जो दूसरे देश की तरफ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब नाम कमाया है।
3 इयोन मोरगन [आयरलैंड और इंग्लैंड]

तत्काल इंग्लैंड टीम के कप्तान व सलामी खिलाड़ी का जन्म इंग्लैंड में नहीं हुआ था वह मूलत आयरलैंड देश से है और आयरलैंड की तरफ से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भी खेलते थे। इस विस्फोटक बल्लेबाज ने वर्ष 2006 में आयरलैंड की ओर से पदार्पण किया था वह वर्ष 2007 के विश्व कप में एक आयरिश खिलाड़ी के तौर पर शामिल भी हुए थे।
खुद को आयरिश बोर्ड द्वारा ज्यादा तवज्जो नहीं मिलने के कारण वर्ष 2009 में मोर्गन ने इंग्लैंड की ओर से खेलने का फैसला किया जिसके बाद से आज तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2015 के विश्व कप में शुरुआती दौर में ही इंग्लैंड को बाहर होना पड़ा था जिसके बाद से ही चयनकर्ताओं ने मोरगन को कप्तानी की कमान सौंप दी थी और अब इंग्लैंड का अधूरा ख्वाब मोरगन ने पूरा कर दिया है।
2 जोफ्रा आर्चर [वेस्टइंडीज और इंग्लैंड]

आईपीएल के ऑक्शन में सरप्राइज फैक्टर के रूप में उभरकर आए जोफ्रा आर्चर का जन्म बारबडोस हुआ था। और तत्कालीन विश्वकप के दौरान की गई घातक गेंदबाजी से वे काफी चर्चा में है। वेस्टइंडीज के लिए उन्होंने दाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में अंडर-19 खेला था लेकिन वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड में चल रही अनिश्चितता के माहौल ने उन्हें इंग्लैंड आने के लिए मजबूर कर दिया।
अपने साथी खिलाड़ी क्रिस जॉर्डन की सलाह पर इंग्लैंड खेलने के लिए आए और इंग्लैंड में भी बड़ी ही सहजता से जोफ्रा को अपनी टीम में शामिल कर लिया, अपने नियमों में बदलाव करके। और इंग्लैंड का है दाव बेहद सटीक साबित हुआ विश्व कप 2019 में जोफ्रा आर्चर ने 20 विकेट लिए हैं जिन्होंने बहुत ही अहम भूमिका निभाई है विश्व कप का खिताब जीतने में।
1 इमरान ताहिर [पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका]
आज दक्षिण अफ्रीकी इन गेंदबाज के रूप में पहचाने जाने वाले इमरान ताहिर का क्रिकेट करियर बहुत ही दिलचस्प रहा है।किसका जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ और पाकिस्तान से ही उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की वह अंडर-19 टीम से पाकिस्तान के लिए खेले व पाकिस्तान ए की टीम के साथ कई दौरे पर भी वह खेलने के लिए गए।
ताहिर की प्रतिभा को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली क्योंकि पाकिस्तान में पहले से बेहतरीन स्पिनर गेंदबाज मौजूद थे इसलिए ताहिर ने दक्षिण अफ्रीका का रुख किया जहां हमेशा से स्पिनरों की कमी महसूस की गई है।
5 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने के बाद वर्ष 2011 में ताहिर को विश्व कप 2011 की टीम में चुना गया और उनकी किस्मत चमक गई। ताहिर इकलौते गेंदबाज है जिन्होंने एकदिवसीय और टी-20 फॉर्मेट में नंबर वन रैंकिंग हासिल की है।
दक्षिण अफ्रीका की ओर से विश्व कप में सर्वाधिक विकेट लेने का कीर्तिमान 40 वर्ष के ताहिर के नाम ही है। तत्कालीन विश्वकप में अफ्रीका के बाहर होने के कारण ताहिर ने एकदिवसीय क्रिकेट स्कोर अलविदा कह दिया हालांकि क्रिकेट के छोटे फॉर्मेट में कुछ समय तक खेलने की संभावना है।