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आईसीसी ने जिम्बाब्वे क्रिकेट को नियमों की अनदेखी के चलते सस्पैंड कर दिया है। इससे जिम्बाब्वे के खिलाड़ी सिकंदर रजा काफी खफा है। उनका कहना है कि वह अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। हमें हर ओर अंधेरा ही नजर आ रहा है।
आईसीसी भले ही ये निलंबन जारी रखता, लेकिन टीम को क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलनी चाहिए थी। अब जिम्बाब्वे के खिलाड़ी कोई और करियर अपनाने के बारे में सोच सकते हैं। मैं नहीं जानता कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के तौर पर हम कहां खेलेंगे। क्या हमें अपना क्रिकेट का सामान जला देना चाहिए और अब हम नौकरी के लिए कहां प्रयास करें।
बता दें कि जिम्बाब्वे टीम का विवादों से पुराना नाता रहा है। जून 2014 में जिम्बाब्वे टीम का टेस्ट स्टेट्स खत्म कर दिया गया था। यही वही जिम्बाब्वे टीम थी जिसमें एक समय एंडी फ्लावर, ग्रांट फ्लावर, हैनरी ओलंगा और नील जॉनसन जैसे क्रिकेटर थे। जिम्बाब्वे की टीम जब टेस्ट स्टेट्स से सस्पैंड हुई तब उनके कप्तान थे तेज गेंदबाज हीथ स्ट्रीक। हालांकि यह बैन हटने के बाद उन्होंने 2005 तक 8 टेस्ट जरूर खेले लेकिन तब तक क्रिकेट जगत में ऑरा ही कुछ ऐसा बन गया था कि जिम्बाब्वे को अपना अगला टेस्ट खेलने के लिए 2011 का इंतजार करना पड़ा।
क्या पड़ेगा प्रभाव : आईसीसी के इस फैसले कारण जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीम का अगस्त में होने वाले ट्वंटी-20 विश्वकप क्वालिफायर और अक्टूबर में पुरूष ट्वंटी-20 विश्वकप क्वालिफायर में हिस्सा लेना नामुमकिन हो गया है।
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